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Pik Vima (PM Fasal Bima Yojana): पूरी जानकारी, लाभ और क्लेम प्रक्रिया

UpdateChowk Team 8 Jan 2026 Verified Content

खेती हमेशा से ही जोखिम भरा पेशा रहा है। कभी सूखे की मार, तो कभी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि किसान की पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है। ऐसे समय में 'पिक विमा' (Pik Vima) यानी फसल बीमा ही किसान का सबसे बड़ा सहारा बनता है।

भारत सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana - PMFBY) एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। यह योजना प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल को हुए नुकसान की भरपाई करके किसानों को कर्ज के जाल से बचाने और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए शुरू की गई है।

महत्वपूर्ण जानकारी

रबी सीजन 2025-26 के लिए फसल बीमा की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना अपना पंजीकरण पूरा करें।

Pik Vima क्या है? (PMFBY की पूरी जानकारी)

Pik Vima या प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की एक फ्लेगशिप योजना है जिसे 2016 में लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य 'एक राष्ट्र - एक योजना' के तहत देशभर के किसानों को एक समान और न्यूनतम प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा देना है।

इस योजना में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रीमियम का बड़ा हिस्सा उठाती हैं, ताकि किसानों पर बोझ कम पड़े। योजना का प्रबंधन और संचालन चुनिंदा प्रमाणित बीमा कंपनियों के माध्यम से किया जाता है, जो तहसील या जिला स्तर पर नियुक्त की जाती हैं।

फसल नुकसान (जोखिम) बीमा सुरक्षा (PMFBY)

Pik Vima: प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध आपका सुरक्षा कवच

Pik Vima Yojana के मुख्य उद्देश्य

  • 1. वित्तीय सहायता: प्राकृतिक आपदाओं, कीटों या रोगों के कारण फसल नष्ट होने की स्थिति में किसानों को तुरंत आर्थिक मदद पहुँचाना।
  • 2. आधुनिक खेती को प्रोत्साहन: नुकसान के डर को कम करके किसानों को खेती में नई तकनीकों और उच्च पैदावार वाले बीजों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • 3. आय में स्थिरता: फसल बर्बाद होने पर भी किसान की आय का एक हिस्सा सुनिश्चित करना ताकि वह अगली बुवाई के लिए तैयार रह सके।

Pik Vima के लाभ (Benefits for Farmers)

व्यापक कवरेज

बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक के सभी जोखिमों का बीमा।

न्यूनतम प्रीमियम

किसानों को केवल 1.5% से 5% तक ही प्रीमियम देना होता है।

Pik Vima प्रीमियम दर (Farmer Premium Rates)

फसल का प्रकार (Season) किसान द्वारा देय प्रीमियम (%) विवरण
खरीफ (Kharif) 2.0% जैसे: धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली आदि।
रबी (Rabi) 1.5% जैसे: गेहूँ, चना, सरसों, अलसी आदि।
वाणिज्यिक/बागवानी 5.0% जैसे: कपास, आलू, गन्ना, मिर्च आदि।

पात्रता (Pik Vima Eligibility)

Pik Vima योजना का लाभ निम्नलिखित किसान ले सकते हैं:

  • सभी भूमिधारक किसान: जिनके पास अपनी जमीन है या जो बटाई पर खेती करते हैं।
  • ऋणी किसान: जिन्होंने बैंक से केसीसी (KCC) ऋण लिया है, उनके लिए बीमा अक्सर अनिवार्य होता था, लेकिन अब यह स्वैच्छिक है।
  • गैर-ऋणी किसान: वे किसान जिन्होंने कोई कर्ज नहीं लिया, वे भी अपनी इच्छा से बीमा करवा सकते हैं।

आवश्यक दस्तावेज (Document Checklist)

Pik Vima क्लेम की गणना कैसे होती है? (Claim Calculation)

कई किसानों को यह समझ नहीं आता कि उन्हें कितना पैसा मिलेगा। फसल नुकसान का क्लेम एक वैज्ञानिक फॉर्मूले पर आधारित होता है:

क्लेम राशि = (देहरी उपज - वास्तविक उपज) / देहरी उपज × बीमित राशि

*देहरी उपज (Threshold Yield) = पिछले 7 वर्षों में से सर्वश्रेष्ठ 5 वर्षों की औसत उपज × क्षतिपूर्ति स्तर (Indemnity Level)

आसान शब्दों में, यदि आपके क्षेत्र की औसत पैदावार से इस साल कम पैदावार हुई है, तो बीमा कंपनी उस कमी के अनुपात में आपको पैसा देती है।

विशेष जोखिम: ओलावृष्टि, बाढ़ और जंगली जानवर

स्थानीय आपदा (Localised Risk)

ओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटना या आकाशीय बिजली से खेत में खड़ी फसल के नुकसान पर व्यक्तिगत स्तर पर सर्वे होता है।

जंगली जानवरों से नुकसान

Latest Update: खरीफ 2026 से जंगली जानवरों (जैसे जंगली सूअर, नीलगाय) द्वारा किए गए नुकसान को भी बीमा के दायरे में लाया जा रहा है।

बीड़ मॉडल (Beed Pattern 80-110) क्या है?

महाराष्ट्र के बीड़ जिले से शुरू हुआ यह मॉडल अब कई राज्यों में अपनाया जा रहा है। इसके तहत:

  • अगर क्लेम 110% से ज्यादा होता है, तो अतिरिक्त पैसा सरकार देती है।
  • अगर क्लेम 80% से कम होता है, तो बीमा कंपनी अपना हिस्सा (20%) रखकर बाकी पैसा सरकार को लौटा देती है।

इससे बीमा कंपनियों और सरकार के बीच संतुलन बना रहता है और किसानों को बीमा सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

Pik Vima में आवेदन कैसे करें? (Apply Online/Offline)

1. ऑनलाइन आवेदन (Step-by-Step)

  1. आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in पर जाएं।
  2. 'Farmer Corner' पर क्लिक करके 'Apply for Crop Insurance' चुनें।
  3. अपना मोबाइल नंबर और आधार दर्ज करके पोर्टल पर लॉगिन करें।
  4. अपनी फसल, बैंक और जमीन का पूरा ब्यौरा भरें।
  5. प्रीमियम का भुगतान ऑनलाइन (Net Banking/UPI) करें।

2. ऑफलाइन आवेदन

किसान अपने नजदीकी **जन सेवा केंद्र (CSC)**, **बैंक शाखा** या **कृषि अधिकारी कार्यालय** में जाकर फॉर्म भर सकते हैं।

महत्वपूर्ण: क्लेम प्रक्रिया (72 घंटे का नियम)

72 घंटों के भीतर सूचना दें!

यदि प्राकृतिक आपदा (ओला, बारिश, बाढ़) से आपकी फसल को नुकसान हुआ है, तो आपको 72 घंटों के भीतर इसकी सूचना निम्नलिखित माध्यमों से देनी होगी:

  • Crop Insurance App: गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।
  • टोल-फ्री नंबर: अपनी बीमा कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
  • बैंक/कृषि विभाग: जहां आपने बीमा करवाया है, वहां लिखित सूचना दें।

सावधानी: देरी से सूचना देने पर आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। नुकसान के समय की कुछ फोटो और वीडियो भी जरूर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

हाँ, बटाईदार किसान भी जमीन के मालिक के साथ हुए अनुबंध (Agreement) और बुवाई प्रमाण पत्र के आधार पर बीमा करवा सकते हैं।

हाँ, खरीफ 2026 से कई राज्यों में जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को भी पीएमएफबीवाई के दायरे में शामिल किया जा रहा है।

सत्यापन प्रक्रिया (Survey) पूरी होने के बाद आमतौर पर 30 से 45 दिनों के भीतर क्लेम की राशि डीबीटी के माध्यम से खाते में जमा कर दी जाती है।

नहीं, अब सरकार ने इसे किसानों की इच्छा पर छोड़ दिया है। आप बैंक को लिखित में देकर बीमा से बाहर (Opt-out) हो सकते हैं।

निष्कर्ष (Farmer Guidance)

Pik Vima केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसान के भविष्य की सुरक्षा है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में फसल का बीमा होना उतना ही जरूरी है जितना कि बुवाई के लिए खाद-पानी। हम सभी किसानों को सलाह देते हैं कि वे समय रहते अपनी फसल का बीमा करवाएं और नुकसान होने पर तुरंत इसकी सूचना दें।

अस्वीकरण: UpdateChowk कोई सरकारी संस्था नहीं है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। फसल बीमा के आधिकारिक नियम हर साल बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले pmfby.gov.in पर जरूर क्लिक करें।
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